बीजापुर

वर्षों से कीचड़ में चल रहे हैं ग्रामीण, 91 लाख खर्च होने के बाद भी नही बनी सड़क,कौन है जिम्मेदार?

फंड आया,खर्च भी हो गया.,लेकिन सड़क अब भी गायब है!?

मुर्गेश शेट्टी,बीजापुर 15 जुलाई/  वर्षों से आवागमन की सुविधा के लिए ग्रामीण तरस रहे हैं। ग्राम पंचायत में गुहार लगाई, शिविरों में भी आवेदन दिया। मगर अब तक कोई भी समाधान नहीं निकल गया। हम बात कर रहे हैं बीजापुर जिले के ग्राम पंचायत रूद्रारम की जहां सचिव और पूर्व सरपंच की लापरवाही के चलते ग्रामीणों को आज भी मूलभूत सुविधा के लिए जूझना पड़ रहा है। पंचायत के तीन वार्ड गेर्रागुड़ा, यालमपारा और सोढ़ीपारा बीते 20 से 25 वर्षों से कीचड़ भरे रास्तों में तब्दील हैं। इन रास्तों पर बारिश में कम से कम एक फीट तक कीचड़ बना रहता है, जिससे गांव वालों को आवागमन में तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामसभा से शिविर तक गुहारें दीं, लेकिन सचिव–सरपंच बने रहे बेपरवाह

ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण को लेकर उन्होंने ग्रामसभा बैठकों, पंचायत स्तर की चर्चाओं और प्रशासनिक शिविरों में कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन नतीजा शून्य रहा। सीसी रोड तो दूर, मुरमीकरण तक का नामोनिशान नहीं है। हर बार सचिव और पूर्व सरपंच ने सिर्फ आश्वासन दिया, लेकिन न काम शुरू हुआ, न सड़क बनी।

बच्चों की पढ़ाई, मरीजों की जान, सबकी कीमत चुका रहा गांव

ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बरसात में सड़कें एक फीट कीचड़ में तब्दील हो जाती हैं। हालात इतने खराब हैं कि बच्चों का स्कूल जाना और मरीजों का अस्पताल पहुंचना तक मुश्किल हो जाता है। एम्बुलेंस यहां तक नहीं पहुंचती, मरीजों को कंधे या उठाकर एम्बुलेंस तक लाया जाता है।

ग्रामीणों से सचिव ने का फंड नहीं आया, लेकिन फाइलों में 91 लाख की राशि खर्च

जब ग्रामीणों ने सचिव से सवाल किया कि सड़क क्यों नहीं बनी, तो उन्होंने साफ कहा फंड नहीं आ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि 15वें वित्त से बीते 4 वर्षों में लगभग 91 लाख की राशि पंचायत को मिली, जिसे अन्य अनावश्यक कार्यों में खर्च कर दिया गया।

ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव को जब भी गांव की बैठकों में बुलाया जाता है, वह या तो आते नहीं हैं, और अगर आते हैं तो कुछ देर बैठकर बिना जवाब दिए चले जाते हैं। इससे स्पष्ट है कि सचिव और पंचायत का रवैया जनसमस्याओं के प्रति पूरी तरह असंवेदनशील है।

जब दलदल भरें सड़क के मुद्दे को लेकर जनपद सीईओ सुरेश देवांगन के पास पहुंचे तो उन्होंने कोई भी बयान देने से साफ इनकार कर दिया। जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बचते हुए नजर आए।

ग्रामीण इस पूरे मामले की जांच करवाने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई के लिए जल्द ही जिला कलेक्टर में आवेदन देने की बात कर रहे है। साथ ही जल्द से जल्द इन तीनों वार्डों की सड़कों का निर्माण कराने की मांग की जायेगी, ताकि लोगों को इस बदहाली से राहत मिल सके।

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