लखनऊ अग्निकांड के बाद जगदलपुर में संचालित कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा तैयारियों को लेकर प्रशासन है ,कितना अलर्ट ??!

अग्निकांड जैसी गंभीर दुर्घटनाओं से बचने के लिए ,क्या है,प्रशासन की तैयारी??!
जगदलपुर । लखनऊ में कोचिंग सेंटर में भीषण अग्निकांड ने पूरे देश में कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं । जिस तरह बिना किसी मापदंड के कोचिंग संस्थान संचालित किये जा रहे हैं ,इस तरह की दुर्घटनाओं की आशंका सदैव बनी रहेगी। लखनऊ के 18 छात्रों से पहले सूरत में 47 छात्र की भी इसी तरह के अग्निकांड में झुलस कर मौत हो गई थी।वहीं दिल्ली में बेसमेंट में संचालित कोचिंग में पानी भरने से यूपीएससी की तैयारी के रहे 3 छात्रों की मौत ही गई थी।
बात करें जगदलपुर शहर की तो यहां भी LKG से 12 वीं तक फिर NEET,IIT,PET,,JEE ,CG PSC, और विभिन्न कंप्यूटर कोर्स के नाम से सैकड़ों संस्थान संचालित हैं । कुछ जगह तो बेसमेंट मे रीडिंग लाइब्रेरी और कोचिंग संचालित है।
लेकिन इन संस्थानों में नामांकित विद्यार्थियों के लिए वहां किस तरह के सुविधाएं और व्यवस्थाएं की गई है , इसकी चिन्ता न तो पालकों को है न ही प्रशासन को।
किसी बड़ी घटना के बाद ही प्रशासन और पालकों की नींद खुलती है।
किसी भी संस्था में फायर सेफ्टी सबसे आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था है और आपात स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा इंतजाम पहले से सुनिश्चित करना संस्थाओं के साथ प्रशासन की भी जिम्मेदारी है।
साधारण से साधारण काम के लिए प्रशासन से लाइसेंस लेने का नियम होता है, लेकिन इस प्रोफेशन में कोई नियम नहीं है। स्कूलों में जितनी संख्या बच्चों की नहीं होती है, उससे कहीं अधिक कोचिंग सेंटरों में है।
जगदलपुर नगर में स्कूल और उच्च शिक्षा दोनों ही स्तर पर कोचिंग संचालित है, लेकिन दोनों के लिए ही कोई नियम या मापदंड नहीं है। वहीं शहर में कई बहुमंजिला इमारत हैं जिनका उपयोग ऐसी ही व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है ,जिसका समय समय पर फायर ऑडिट कराया जाना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। किसी भी संस्थान जिसमें 5 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं उनमें सुरक्षा मानकों की जांच की जानी चाहिए । ताकि लखनऊ , दिल्ली और सूरत जैसी घटनाओं से बचा जा सके ।




