राष्ट्रीय राजमार्ग NH-63 बना मुसीबत का रास्ता
मुर्गेश शेट्टी,बीजापुर 29 अगस्त।छत्तीसगढ़ के बस्तर से तेलंगाना के निजामाबाद तक फैला राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-63 इन दिनों भारी बदहाली का शिकार है। लगभग 550 किलोमीटर लंबे इस मार्ग में छत्तीसगढ़ का हिस्सा 220 किलोमीटर, महाराष्ट्र का 60 किलोमीटर और तेलंगाना का 270 किलोमीटर है। इनमें महाराष्ट्र के 60 किलोमीटर हिस्से की हालत सबसे ज्यादा खराब है — खासकर लगभग 30 किलोमीटर का stretch तो पूरी तरह से जर्जर हो चुका है।

यात्री और वाहन चालक बेहाल
इस बदहाल सड़क के कारण पिछले 2-3 वर्षों से बसें, मालवाहक गाड़ियाँ और यात्री बुरी तरह से परेशान हैं। बारिश के मौसम में यह स्थिति और भी भयावह हो जाती है। सड़क पर गहरे गड्ढे पड़ चुके हैं, जिनमें भारी वाहन फंस जाते हैं। इन फंसी हुई गाड़ियों को निकालने के लिए जेसीबी, क्रेन और ट्रैक्टरों की मदद लेनी पड़ती है। कई बार एक ही वाहन एक से अधिक जगहों पर फंस जाता है, जिससे यात्रियों की स्थिति बेहद दयनीय हो जाती है।

जंगलों से घिरा मार्ग, सुरक्षा भी बनी चुनौती
इस मार्ग में अधिकांश हिस्सा जंगलों से घिरा हुआ है और गांव बहुत कम हैं, जिससे यात्रियों को न सिर्फ सड़क की खराबी बल्कि सुरक्षा की भी चिंता सताती है। मोबाइल नेटवर्क की कमी और सहायता की अनुपलब्धता इस मार्ग को और अधिक खतरनाक बना देती है।

प्रशासन की उदासीनता पर सवाल
जहां छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की ओर सड़क की स्थिति अपेक्षाकृत ठीक है, वहीं महाराष्ट्र के हिस्से की सड़क की स्थिति को लेकर राज्य सरकार और प्रशासन की गंभीर उदासीनता सामने आ रही है। 2019-20 में निर्मित यह सड़क मात्र 5-6 साल में ही इतनी खराब हो चुकी है कि कुछ बस ऑपरेटरों ने इस मार्ग पर सेवाएं बंद कर दी हैं। इससे यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों से लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।
जनहित में माँग: जल्द हो मरम्मत
जनता की ओर से यह मांग बार-बार उठ रही है कि महाराष्ट्र शासन तत्काल इस दिशा में ठोस कदम उठाए और इस मार्ग की मरम्मत कराए। यह सिर्फ तीन राज्यों को जोड़ने वाला एक मार्ग नहीं, बल्कि हजारों लोगों की जीवन रेखा है — जिसमें व्यवसाय, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवागमन की अनेक जरूरतें जुड़ी हुई हैं।

जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि इस विषय को प्रशासन तक पहुँचाया जाए ताकि जल्द से जल्द कार्रवाई हो सके। यह समाचार जनहित में प्रकाशित किया गया है।

