दंतेवाड़ा

गीदम समिति का तेंदूपत्ता 38 वर्षों में सर्वाधिक दर पर विक्रय, संग्राहकों को मिलेगा बड़ा लाभ

4000 परिवार होंगे लाभान्वित

दंतेवाड़ा/गीदम। गीदम प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समिति के लिए वर्ष 2026 ऐतिहासिक रहा। राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा 16 जुलाई 2026 को आयोजित ऑनलाइन निविदा में समिति अंतर्गत शासकीय संग्रहण का तेंदूपत्ता ₹10,609 एवं ₹10,909 प्रति मानक बोरा की दर से विक्रय हुआ। वर्ष 1988 से संचालित समिति के 38 वर्षों के इतिहास में यह सर्वाधिक विक्रय दर है, जो समिति एवं क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है।

पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि

वर्ष 2025 में समिति का तेंदूपत्ता ₹7,689 प्रति मानक बोरा की दर से विक्रय हुआ था, जबकि इस वर्ष रिकॉर्ड दर प्राप्त हुई है। शासकीय खरीदी में गीदम समिति प्रदेश में सर्वाधिक दर प्राप्त करने वाली समितियों में शामिल हो गई है।

4,000 संग्राहक परिवारों को मिलेगा सीधा लाभ

अधिक दर पर विक्रय होने से प्राप्त अतिरिक्त आय का लाभ बोनस के रूप में समिति अंतर्गत तेंदूपत्ता संग्रहण करने वाले लगभग 4,000 संग्राहक परिवारों को मिलेगा। इससे वनाश्रित परिवारों की आय बढ़ेगी और उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।

सामूहिक प्रयास से मिली ऐतिहासिक सफलता

इस उपलब्धि पर मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ), डीएफओ दंतेवाड़ा, समस्त वन विभाग, जिला लघु वनोपज संघ के कर्मचारियों, सभी फड़ मुंशी भाइयों एवं प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी साथियों के प्रति समिति ने हार्दिक आभार व्यक्त किया है। समिति ने इसे सभी के सामूहिक प्रयास एवं समर्पण का परिणाम बताया।

संग्राहकों का हित सर्वोपरि – डीएफओ

डीएफओ दंतेवाड़ा ने समिति के सभी अधिकारी-कर्मचारियों, फड़ मुंशियों एवं सहयोगी अमले को बधाई देते हुए कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहकों का हित सर्वोपरि है। अधिक दर पर विक्रय का सीधा लाभ बोनस के रूप में संग्राहक परिवारों को मिलेगा तथा भविष्य में भी पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण कार्य के माध्यम से उनके हितों को प्राथमिकता दी जाएगी।

100 प्रतिशत ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था

जिला यूनियन दंतेवाड़ा द्वारा पिछले कई वर्षों से तेंदूपत्ता संग्रहण, बोनस, छात्रवृत्ति, बीमा एवं लघु वनोपज संबंधी कार्य ऑनलाइन ऐप के माध्यम से संचालित किए जा रहे हैं। राज्य शासन की डिजिटल भुगतान व्यवस्था के तहत डीबीटी के माध्यम से संग्राहकों के बैंक खातों में राशि निर्धारित समय-सीमा के भीतर सीधे जमा की जाती है। इससे भुगतान प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी हुई है तथा संग्राहकों को समय पर सीधा लाभ मिल रहा है।

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