Thursday, March 19, 2026
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मेडिकल लैब से माटी तक, आरती ने पशुधन से लिखी सफलता की नई कहानी, अच्छी नौकरी छोड़ गांव में रचा आत्मनिर्भरता का मॉडल….

रायपुर: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के सुदूर वनांचल एवं सुंदर पहाड़ियों के बीच बसे लैलूंगा विकासखंड के ग्राम बागुडेगा की निवासी आरती पटेल ने यह साबित कर दिया है कि सफलता केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव की मिट्टी में भी अपार संभावनाएं छिपी होती हैं।

आरती पटेल ने मेडिकल क्षेत्र में डीएमएलटी की पढ़ाई पूरी करने के बाद रायगढ़ के एक निजी अस्पताल में कार्य किया, लेकिन उनका सपना स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने का था। वर्ष 2020 में विवाह बाद वे लैलूंगा के समीप ग्राम चोरंगा में एक किसान परिवार में बहू बनकर आईं और यहीं से उनके जीवन ने एक नई दिशा ली।

पढ़ी-लिखी होने के कारण उन्होंने शासन की योजनाओं की जानकारियां ली और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाली बिहान योजना से जुड़ने का निर्णय लिया। जनपद पंचायत लैलूंगा के मार्गदर्शन एवं जनपद सीईओ के सहयोग से उन्होंने  बिहान योजना के माध्यम से “संतोषी स्वसहायता समूह” का गठन किया, जिसमें जनपद स्तर के अमले का सराहनीय सहयोग मिला। पिछ्ले चार साल से यह व्यवसाय कर रही है।
वर्ष 2025 में समूह के माध्यम से उन्होंने लगभग साढ़े तीन लाख रूपए का ऋण लेकर उन्नत नस्ल की गायों का पालन प्रारंभ किया। वर्तमान में उनके पास कुल नौ गायें हैं, जिनसे प्रतिदिन सुबह-शाम मिलाकर सैकड़ों लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है।

दूध के साथ वैल्यू एडिशन से बढ़ी आय

आरती पटेल ने केवल दूध उत्पादन तक सीमित न रहकर पनीर, शुद्ध देसी घी एवं खोआ जैसे उत्पाद तैयार करना भी प्रारंभ किया। उनके समूह द्वारा तैयार उत्पादों की सप्लाई रायगढ़ सहित आसपास के जिले मॉल एवं विभिन्न दुकानों में की जा रही है। इससे समूह को प्रतिमाह लगभग एक लाख रुपए की आय प्राप्त हो रही है।

मेडिकल लैब से माटी तक, आरती ने पशुधन से लिखी सफलता की नई कहानी
आरती का कहना है कि उन्हें अब पशुधन व्यवसाय से मेडिकल क्षेत्र की तुलना में अधिक आय प्राप्त हो रही है।

जैविक खेती की दिशा में भी सराहनीय पहल

आरती पटेल द्वारा पशुपालन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। वे गाय के गोबर से वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर रही हैं, जिसकी मांग स्थानीय किसानों में निरंतर बनी हुई है। उनका मानना है कि जैविक खाद भूमि की उर्वरता बढ़ाने एवं पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उन्होंने बताया कि यदि उद्यानिकी एवं वन विभाग की नर्सरियों में इस जैविक खाद की मांग बढ़े, तो समूह की आय में और वृद्धि हो सकती है। आरती पटेल ने अपनी सफलता का श्रेय बिहान योजना, जिला प्रशासन, जिला पंचायत एवं जनपद पंचायत लैलूंगा को देते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया है।

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