UNESCO विश्व धरोहर स्थल की सूचि के लिए, बस्तर के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान का प्रस्ताव प्रेषित

जगदलपुर । UNESCO विश्व धरोहर स्थल के रूप में बस्तर के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान को नामांकित करने हेतु राष्ट्रीय उद्यान की ओर से प्रस्ताव पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग भारत सरकार को प्रेषित किया गया है। 1982 में स्थापित 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का राष्ट्रीय उद्यान यहां की 15 से अधिक सुंदर लाइमस्टोन की गुफाएं, तीरथगढ़ , कांगेर धारा जलप्रपात , दुर्लभ वन्य जीव वन्यजीव जैसे, उदबिलाव, माउस डियर, जॉइंट स्क्विरल, लेथिस सॉफ्टशेल टर्टल, जंगली भेड़िया के साथ-साथ 200 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां , वनस्पतियों की 900 अधिक प्रजातियों और तितलियों की 140 से अधिक प्रजातियों के ख्याति प्राप्त है। पार्क के आसपास निवासरत ध्रुव और गोंड जनजाति समुदायों का राष्ट्रीय उद्यान के आसपास के जंगलों से गहरा सांकृतिक संबंध पार्क को असाधारण सार्वभौमिक मूल्य के लिए यूनेस्को के दिशानिर्देशों को पूरा करती हैं।
इस प्रस्ताव अंर्तगत में कोटमसर, कैलाश और दंडक गुफाओं सहित भूवैज्ञानिक पहलुओं को शामिल किया गया है, जो उनके वास्तविक गठन और विकास को दर्शाते हैं। कोटमसर गुफा में पुरातात्विक खोजों से पूर्व के एतिहासिक मानव निवास का पता चलता है, जो सांस्कृतिक महत्व और मानव-पर्यावरण संपर्क पर UNESCO के द्वारा दिए गए महत्व के अनुरूप है।
कांगेर वैली नेशनल पार्क ने कई वर्षों से अपनी पारिस्थितिक प्रक्रियाओं और क्षेत्र की विशेषताओं की अखंडता को बनाए रखा है। पार्क में इसके असाधारण सार्वभौमिक मूल्य को प्रदर्शित करने के लिए सभी आवश्यक तत्व मौजूद हैं। पार्क के विविध प्राकृतिक आवास जो वन्य जीवन का समर्थन करते हैं, अच्छी तरह से संरक्षित हैं, और पार्क के भीतर खुले क्षेत्र पौधों और पारिस्थितिक प्रक्रियाओं की प्राकृतिक प्रगति के अवसर प्रदान करते हैं।
राष्ट्रीय उद्यान के निदेशक धम्मशिल गनवीर ने बताया कि बस्तर के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान की असाधारण प्राकृतिक और सांस्कृतिक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए यह प्रस्ताव भेजा गया है । राष्ट्रीय उद्यान को विश्व धरोहर की सूची में शामिल होने से पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी साथ ही इससे यहां के स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।



