Wednesday, February 4, 2026
Homeछत्तीसगढ़रायपुररायपुर साहित्य उत्सव में ‘नई पीढ़ी की फिल्मी दुनिया’ पर परिचर्चा, सिनेमा...

रायपुर साहित्य उत्सव में ‘नई पीढ़ी की फिल्मी दुनिया’ पर परिचर्चा, सिनेमा और साहित्य के संबंधों पर हुआ विमर्श

रायपुर, 24 जनवरी 2026/रायपुर साहित्य उत्सव के अंतर्गत श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में आज “नई पीढ़ी की फिल्मी दुनिया” विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में अभिनेता श्री सत्यजीत दुबे, अभिनेत्री सुश्री टी. जे. भानु, विधायक एवं प्रसिद्ध कलाकार श्री अनुज शर्मा तथा सुश्री सुविज्ञा दुबे विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

परिचर्चा के दौरान श्री अनुज शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा अत्यंत सरल और सहज है, जिसे संवाद के माध्यम से और अधिक सुलभ बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय महिलाओं की सशक्त भूमिका का है, जहां सिनेमा और समाज दोनों क्षेत्रों में उनका योगदान निरंतर बढ़ रहा है। उन्होंने फिल्म निर्माण प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सिनेमा में निर्देशक की भूमिका प्रमुख होती है, रंगमंच में अभिनेता की प्रधानता होती है, जबकि धारावाहिकों में लेखक की भूमिका निर्णायक होती है। उन्होंने साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी रचनाकार की पहचान उसके पहनावे से नहीं, बल्कि उसकी रचनाओं से होती है।

अभिनेता श्री सत्यजीत दुबे ने कहा कि किसी भी फिल्म में भावनात्मक तत्व होना आवश्यक है, तभी वह दशकों तक दर्शकों के मन में जीवित रहती है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का साहित्य अत्यंत समृद्ध है और यहां अच्छी कहानियों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि आवश्यकता केवल पाठक वर्ग को प्रोत्साहित करने की है कि वे पढ़े। उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ की लोकजीवन और संस्कृति में असंख्य कथाएं समाहित हैं, जिन्हें सिनेमा के माध्यम से प्रस्तुत किया जा सकता है।

अभिनेत्री सुश्री टी. जे. भानु ने कहा कि डिजिटल माध्यमों, विशेषकर यूट्यूब, ने नए कलाकारों के लिए अवसरों के द्वार खोले हैं। छोटी कहानियां अब विभिन्न मंचों के माध्यम से व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा कि यात्रा का सुख केवल गंतव्य तक पहुंचने में नहीं, बल्कि पूरी यात्रा प्रक्रिया में निहित होता है। उन्होंने यह भी कहा कि जब महिलाएं निर्माता की भूमिका निभाती हैं, तो वे सेट पर कार्यरत प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकताओं और भावनाओं का ध्यान रखती हैं। उन्होंने सिनेमा में दृश्यात्मक प्रस्तुति को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

सुश्री सुविज्ञा दुबे ने कहा कि बच्चों में आत्मविश्वास का विकास घर से ही प्रारंभ होना चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को अभिव्यक्ति के अवसर प्रदान करें, जिससे उनमें सृजनात्मकता और आत्मबल विकसित हो सके।

परिचर्चा में वक्ताओं ने नई पीढ़ी के सिनेमा, साहित्य और डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव पर विचार साझा करते हुए कहा कि सशक्त कहानी, भावनात्मक जुड़ाव और सामाजिक जिम्मेदारी ही भविष्य के सिनेमा की दिशा तय करेंगे।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_img
Advertisement Carousel