Wednesday, February 4, 2026
Homeछत्तीसगढ़रायपुरगीदम BEO ने मांगी बदमाशी में लिप्त शिक्षकों की जानकारी,अमर्यादित भाषा पर...

गीदम BEO ने मांगी बदमाशी में लिप्त शिक्षकों की जानकारी,अमर्यादित भाषा पर शिक्षकों ने जताई नाराजगी,बताया शिक्षकों का अपमान

गीदम। दंतेवाड़ा जिले के गीदम विकासखंड में विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने एक अजीबोगरीब फरमान जारी किया इसके बाद से शिक्षकों में नाराजगी व्याप्त हो गई है।
दरअसल गीदम के विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने शिक्षकों की जानकारी प्राप्त करने के संदर्भ में एक आदेश जारी किया है जिसमें उन्होंने लापरवाह शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था के संबंध में जानकारी मांगते हुए आदेश पत्र के आठवें बिंदु में बदमाशी में लिप्त शिक्षकों की जानकारी मांगी है। इसी बिंदु को लेकर शिक्षकों में भारी नाराजगी देखी गई है जिसकी शिकायत शिक्षक कलेक्टर से करने की तैयारी कर रहे हैं।


शिक्षकों का कहना है कि शिक्षक को सामाजिक दृष्टि से बेहद सम्मानित पद माना गया है, यदि शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी ही शिक्षकों के लिए ऐसे अमर्यादित शब्दों का प्रयोग करेंगे तो विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों और उनके पालकों में शिक्षकों को लिए किस तरह की भावना उत्पन्न होगी।
ऐसे शब्द शिक्षकों की सामाजिक प्रतिष्ठा को धूमिल करते हैं इसलिए वह प्रशासन से इस संदर्भ में विरोध जताएंगे।

शिक्षकों में इस शब्दावली को लेकर आक्रोश है। क्या किसी शिक्षक को “बदमाश” करार देना एक जिम्मेदार अधिकारी को शोभा देता है? यह सवाल अब जोर पकड़ता जा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि विभागीय सूचनाएं चाहे जितनी भी आवश्यक हों, उनके लिए उपयोग की जाने वाली भाषा मर्यादित और गरिमामयी होनी चाहिए।

शिक्षक संघ ने भी जताया विरोध
इस संदर्भ में स्थानीय शिक्षक संघों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इस पत्र को शिक्षा विभाग की गरिमा के विपरीत बताया है। उनका कहना है कि शिक्षक समाज को देश का निर्माता कहा जाता है, और यदि किसी के विरुद्ध कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही होनी है तो वह निर्धारित प्रक्रिया से हो — न कि उन्हें “बदमाश” जैसे शब्दों से नवाज़ा जाए।

पत्र की समीक्षा की मांग
अब यह मांग तेज हो रही है कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी को अपने शब्दों के चयन पर स्पष्टीकरण देना चाहिए और इस पत्र को तुरंत निरस्त किया जाए। वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी से इस पत्र की जांच की मांग भी उठ रही है।

शिक्षक संघ का कहना है की क्या यह प्रशासनिक असंवेदनशीलता है या भाषा की चूक? क्या अधिकारियों को प्रशिक्षण की जरूरत है कि वे पद की गरिमा के अनुरूप भाषा का चयन करें?

यह तो आने वाले दिनों में सामने आएगा, लेकिन इतना स्पष्ट है कि यह पत्र गीदम शिक्षा विभाग के लिए एक बड़ी फजीहत बनता जा रहा है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_img
Advertisement Carousel