Wednesday, February 4, 2026
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आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया के बयान पर बस्तर सांसद महेश कश्यप का पलटवार,कहा आदिवासियों पर बोलने का कांग्रेस को नैतिक अधिकार नहीं

कांग्रेस के लोग माओवाद,नक्सलवाद और अलगाववाद के समर्थक – बस्तर सांसद, महेश कश्यप

जगदलपुर, 2 जुलाई 2025 / आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया के बयान पर बस्तर सांसद महेश कश्यप ने तगड़ा पलट वार किया है। महेश कश्यप ने कहा कि कांग्रेस से एक प्रश्न उत्तर पूछा जाना चाहिए की देश के 78 वर्षों में 60 वर्ष कांग्रेस का शासन रहा इस दौरान उन्होंने आदिवासियों के हित के लिए कौन से कार्य किये । सांसद महेश कश्यप ने कहा कांग्रेस में 60 सालों तक अनुसूचित जनजाति विभाग को पशु विभाग के साथ अटैच रखा था। 1999 में स्व. अटल बिहारी वाजपेई ने सत्ता में आने के बाद इस विभाग को स्वतंत्र विभाग बनाया।

उन्होंने कहा कि बस्तर आदिवासी बहुल क्षेत्र है जिसे कांग्रेस ने अपने शासन के दौरान काले पानी की सजा दे रखी थी बस्तर में बिजली पानी सड़क जैसी मौलिक सुविधाओं का भी अभाव था।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने छत्तीसगढ़ का गठन किया इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने बस्तर में सड़क बिजली पानी जैसी मौलिक सुविधा प्रदान की, आज इसलिए बस्तर की पहचान सारी दुनिया में है।बस्तर में नक्सलवाद थोप कर रखने वाली कांग्रेस पार्टी है और जिस पार्टी ने दशकों तक आदिवासियों को बस्तर में मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा वह कांग्रेस आज खुद को आदिवासी हितैषी बता रही है।

सांसद महेश काश अपने कांग्रेसियों पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस के लोग हमेशा से नक्सलवाद माओवाद और अलगाववाद के समर्थक रहे हैं इन्होंने आदिवासियों के हित में कोई कार्य नहीं किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र और प्रदेश की बीच भाजपा सरकार प्रदेश से नक्सलवाद खत्म कर आदिवासियों के जल जंगल और जमीन सहित उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा करने के लिए संकल्पित है।

महेश कश्यप ने कहा कि 2026 तक प्रदेश स्व माओवाद खत्म होगा और सभी आवश्यक मौलिक सुविधाएं गांव तक पहुंचेंगी।

सांसद महेश कश्यप ने कहा कि कांग्रेस के लोग आदिवासियों की बात ना ही करें क्योंकि देश प्रदेश और बस्तर के आदिवासियों ने कांग्रेस को पूरी तरह जानकारी दिया है और यह सभी कांग्रेस मुक्त होने जा रहे हैं इसलिए कांग्रेस को आदिवासियों के विषय में बात करने का नैतिक अधिकार नहीं है।

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